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Sunday, December 30, 2018

Universal Basic Income: मोदी की गेमचेंजर स्कीम, हर महीने खाते में आने वाले हैं पैसे!


हिंदी बेल्ट के 3 राज्यों के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ रही है. मोदी सरकार ऐसी ही एक 'मास्टर स्ट्रोक' योजना ला रही है जो अगले चुनाव में उसकी नैया पार करा सकती है.

पिछले दिनों हिंदी बेल्ट के 3 राज्यों के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ रही है. इस बीच सूत्रों का कहना है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले एक ऐसी योजना लाने की तैयारी कर रही है, जो चुनाव के दौरान 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है.

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार की यह योजना किसानों की कर्जमाफी वाली योजना से भी दो कदम आगे हैं. इस स्कीम को UBI यानी Universal Basic Income स्कीम माना जा रहा है. इस स्कीम के दायरे में देश के सभी नागरिक आएंगे, इनमें किसान, व्यापारी और बेरोजगार युवा भी शामिल होंगे. इस योजना के तहत देश के हर नागरिक को 2,000 से 2,500 रुपये तक हर महीने दिए जा सकते हैं.

सरकार जीरो इनकम वाले सभी नागरिकों के बैंक खातों में एक तयशुदा रकम सीधा ट्रांसफर करेगी. जीरो इनकम वाले नागरिकों का मतलब साफ है कि वो नागरिक जिनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं है.

सरकार किसानों के लिए सरकार एक अलग स्कीम लाने पर भी विचार कर रही है जिसके तहत कम कीमत पर फसल बेचने वाले किसानों के नुकसान की भरपाई की जाएगी. नुकसान की भरपाई के लिए जो भी रकम दी जाएगी, वो सीधे किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी.
सूत्रों के अनुसार पीएमओ में जल्दी ही अलग-अलग मंत्रालयों के साथ बैठक भी करेगा जिससे  जल्दी से जल्दी स्कीम का खाका तैयार किया जा सके.

खाते में कैसे आएगा पैसा?
यूनिवर्सल बेसिक इनकम योजना को लागू करने के लिए आधार नंबर का इस्तेमाल किया जाएगा. योजना में शामिल होने वाले नागरिक के बैंक खाते को आधार नंबर से लिंक किया जाएगा और फिर सरकार की ओर से दिए जाने वाले पैसे को सीधे उसके खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा. अभी तक घरेलू गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी खाते में ट्रांसफर होती थी, लेकिन हो सकता है कि इस स्कीम के लागू होने के बाद हर तरह की सब्सिडी बंद कर दी जाए.

लंदन के एक प्रोफेसर का था आइडिया
यूबीआई का सुझाव सबसे पहले लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गाय स्टैंडिंग ने दिया था जिनकी अगुवाई में मध्य प्रदेश के इंदौर के पास 8 गांवों में पांच साल के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया. ट्रायल के तौर पर इन गांवों की 6,000 की आबादी के बीच 2010 से 2016 के बीच इस प्रोजेक्ट को चलाया गया. फिर 500 रुपये गांव वालों के बैंक खाते में हर महीने डाले गए. वहीं बच्चों के खाते में 150 रुपये जमा कराए गए. इससे लोगों को काफी फायदा हुआ.

प्रयोग के सफल होने के बाद प्रोफेसर स्टैंडिंग ने दावा किया कि मोदी सरकार इस स्कीम को लागू करने के लिए गंभीर है. शुरुआत में इस स्कीम के तहत आर्थिक सर्वे 2011 के आधार पर लोगों को शामिल किया सकता है.

इस स्‍कीम की चर्चा लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन कहा जा रहा है कि हाल ही में विभिन्न मंत्रालयों से इस संबंध में राय मांगी गई है. इस स्कीम के तहत करीब 10 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं. साल 2016-17 के आर्थिक सर्वे में सरकार को इस स्कीम को लागू करने की सलाह दी गई थी. उम्‍मीद की जा रही है कि नए साल के बजट में इस बड़ी योजना का एलान हो सकता है


Saturday, December 29, 2018

जियो ग्राहकों की लगी लॉटरी, फ्री में कराएं 399 का रिचार्ज


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (29 दिसंबर): जियो यूजर्स के लिए खुशखबरी है। नए साल के मौके पर जियो ने बड़ा धमाका किया है। जियो ने नए साल के मौके पर अपने ग्राहकों के लिए बड़े ऑफर का ऐलान किया है। पिछले साल की तरह इस बार भी अपने ग्राहकों के लिए हैप्पी न्यू ईयर ऑफर लांच कर दिया है। जियो के हैप्पी न्यू ईयर ऑफर की शुरुआत 28 दिसंबर से हो गई है और 31 जनवरी 2019 तक चलेगी
इसके तहत जियो अपने ग्राहक को रीचार्ज पर 100 फीसदी का कैशबैक देने का ऐलान किया है। इसके लिए आपको 399 रुपये का रिचार्ज करना होगा। ये कैशबैक रिलायंस जियो के AJIO कूपन के तौर पर दिया जाएगा यानी AJIO की वेबसाइट पर आप किसी भी खरीदारी के लिए इसे यूज कर सकते हैं। इस ऑफर का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले आपको अपने जियो नंबर पर 399 रुपये का रिचार्ज कराना होगा। जैसे ही आपने रिचार्ज कराया कंपनी 399 रुपये का AJIO कूपन आपको देगी जो AJIO की वेबसाइट पर MyCoupon सेक्शन में उपलब्ध होगा। हालांकि इसे यूज करने के लिए आपको AJIO की वेबसाइट से 1,000 रुपये की शॉपिंग करने होगी। आपको इस वेबसाइट से 1000 रुपये का सामान खरीदते हैं तो इस कूपन को रीडीम करने पर आपको 599 रुपये ही देने होंगे।
जियो का हैप्पी न्यू ईयर ऑफर Reliance Jio के पुराने और नए दोनों कस्टमर्स के लिए है। इस ऑफर की शुरुआत हो चुकी है और यह 31 जनवरी 2019 तक चलेगा। हालांकि 399 रुपये के कूपन को AJIO की वेबसाइट पर 15 मार्च 2019 तक रीडीम कर सकते हैं। अगर आपको AJIO के बारे में नहीं पता तो बता दें कि यह मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस का फैशन बेस्ड ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जिसकी शुरुआत 2016 में हुई थी। यहां से ऑनलाइन शॉपिंग कर सकते हैं। रिलायंस जियो का नया ऑफर दरअसल AJIO के बारे में ज्यादा से ज्यादा यूजर्स को अवेयर करने के लिए बनाया गया है।

Friday, December 28, 2018

Paytm App चलाने वालों के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली: अगर आप एंड्राइड फोन का इस्तेमाल करते है तो आपने Paytm का नाम भी जरुर सुना होगा. Paytm एक डिजिटल वॉलेट और बैंक है. आज भारत में Paytm को सबसे लोकप्रिय वॉलेट माना जाता है. हाल ही में Paytm वॉलेट ने अपनी एक नई सर्विस शुरू करी है. जिसका नाम Paytm Postpaid है.
इस सर्विस में आपको क्रेडिट कार्ड की तरह पैसे मिलेंगे. इस सेवा का इस्तेमाल कर आप Paytm पर कुछ भी खरीद सकते है. जिसके लिए आपको पैसे देने की कोई ज़रूरत नही पड़ेगी. आपको इस सर्विस में पुरे 1 महीने तक के लिए Paytm अपनी तरफ से पैसे देगा.
अगर आपने पहले कभी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया है तो आप इस सर्विस को आसानी से समझ सकते है. साफ़ शब्दों में बताया जाए तो आपको Paytm पुरे एक महीने तक लिए कुछ पैसे लोन देगा. जिसके लिए आपको कुछ भी अलग से कोई रकम नही देनी होगी.

कैसे करें इस सेवा को एक्टिवेट?
Paytm की यह सेवा हर किसी के लिए उपलब्ध नही है. इस सेवा को अभी कुछ ही यूजर्स को दिया गया है. अगर आप इस सेवा का आनंद लेना चाहते है तो आपको इसके लिए थोडा इंतज़ार करना पड़ सकता है. अभी फ़िलहाल यह सेवा सिर्फ बीटा वर्जन लोगों के लिए है.

Thursday, December 27, 2018

जिओ का नया ऑफर 99 रुपये में 1.5GB डाटा

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग में, आज हम आपको बता रहे हैं जिओ द्वारा लांच किए गए एक और सस्ते प्लान के बारे में, इस प्लान में जिओ दे रहा है 99 रुपये में 1.5 GB डेटा प्रतिदिन ।


देश की सबसे बड़ी ओर सबसे सस्ती कंपनी जिओ ने लांच किया है एक और नया ऑफर ,जियो का यह नया प्लान एयरटेल भारती कंपनी पर बहुत भारी पड़ने वाला है. इस बात से तो सभी वाकिफ है कि रिलायंस जियो कंपनी शुरू से ही सस्ते तथा किफायती ऑफर उपलब्ध करवाने के लिए जानी जाती है. लेकिन यह क्या अब जियो द्वारा सिर्फ ₹99 में 1.5 जीबी डाटा उपलब्ध करवाया जाएगा. चलिए पूरी तरह से जानते हैं इस खबर के बारे में


जियो के इस शानदारऑफर में ग्राहकों को पूरे 1 महीने के लिए 45 जीबी डाटा उपलब्ध करवाया जाएगा. सीधा सीधा कहा जाए तो अब सिर्फ ₹99 के रिचार्ज में पूरे 1 महीने के लिए प्रतिदिन 1.5 जीबी डाटा उपलब्ध करवाया जाएगा. स्पष्ट कर देते हैं कि रिलायंस जियो कंपनी का यह ऑफर हाल ही में रेलवे तथा जियो के बीच अनुबंध के चलते लांच किया गया है. मतलब साफ है कि जियो का यह ऑफर सिर्फ रेलवे के अधिकारियों के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा. जियो का यह ऑफर 1 जनवरी 2019 से रेलवे अधिकारियों को मिलने लगेगा.

जानकारी सामने आई है कि रिलायंस जिये कंपनी रेलवे अधिकारियों को अपना 4G मोबाइल भी उपलब्ध करवाएगी. जिन ग्राहकों के पास 4G स्मार्टफोन है उनके लिए नहीं बल्कि जिनके पास सिर्फ 2G या 3G स्मार्टफोन है, उनको जियो का 4G फोन उपलब्ध करवाया जाएगा. रेलवे अधिकारियों को सिर्फ ₹99 वाला ही नहीं, बल्कि दो अन्य ऑफ अभी उपलब्ध करवाए जाएंगे. जिसमें 125₹ के रिचार्ज में 1 महीने के लिए 60gb डाटा तथा ₹67 के रिचार्ज में 1 महीने के लिए 30GB डाटा वाले ऑफर शामिल है |

दोस्तों फिलहाल ये सुबिधा रेलवे कर्मचारियों के लिए दी जा रही है और नए साल के शुरू में जल्द ही ये सेवा बाकी सब लोगो को भी दी जाएगी

दोस्तों जानकारी अच्छी लगी हो तो हमें फॉलो जरूर कीजियेगा क्योंकि आपका एक फॉलो ही हमारी मेहनत वापस देता है | जय हिन्द


किसानों, बेरोजगारों को हर महीने मिलेगी सैलरी, सरकार कर सकती है यह बड़ा एलान


 
केंद्र सरकार जल्द ही किसानों और बेरोजगारों को बड़ा तोहफा दे सकती है। इस तोहफे के तहत छोटे, मध्यम किसानों और बेरोजगार युवकों व युवतियों को हर महीने सैलरी मिलेगी, जिससे उनका जीवन यापन आसानी से हो सके। 

27 दिसंबर को होगी बैठक 
इस प्लान को हरी झंडी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता मे होने वाली एक बैठक में इस पर चर्चा होगी। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इस बैठक से पहले सभी मंत्रालयों से यूनिवर्सल बेसिक इनकम के बारे में सुझाव मांगे गए हैं। सुझावों पर गौर करने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली अंतरिम बजट में इसकी घोषणा कर सकते हैं। 
क्या है यूबीआई

संसद में वर्ष 2017-17 के लिए पेश आर्थिक सर्वेक्षण में इसका जिक्र किया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया था कि यूबीआई एक बेहद शक्तिशाली विचार है और यदि यह समय इसे लागू करने के लिए परिपक्व नहीं है तो इस पर गंभीर चर्चा तो हो ही सकती है।
इसमें कहा गया है कि सिर्फ केन्द्र सरकार की ही करीब 950 योजनाएं चलती हैं जिस पर सकल घरेलू उत्पाद की करीब पांच फीसदी राशि खर्च होती है। इसके अलावा मध्यम वर्ग को खाद्य, रसोई गैस और उर्वरक पर सकल घरेलू उत्पाद की तीन फीसदी राशि खर्च होती है। यह राशि लक्ष्य समूह तक पहुंच सके, इसमें यूबीआई सहायक हो सकता है।

बैंक खाते में ट्रांसफर होगी राशि

इसमें कहा गया है कि हर आंख से आंसू पोछने का महात्मा गांधी का उद्देश्य पूरा करने में यूबीआई सफल हो सकता है। इस योजना में राशि का हस्तांतरण सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में होगा, इसलिए लाल फीताशाही या ब्यूरोक्रेसी से इसे निजात मिल सकती है।

इसमें कहा गया था कि यूबीआई के लिए जन धन, आधार और मोबाइल -जैम- में से दो चीजें तो पूरी तरह से कार्यशील हैं। सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया था कि इसे लागू करने से गरीबी में आधा फीसदी की कमी हो सकती है और इसे लागू करने पर सकल घरेलू उत्पाद का महज चार से फीसदी राशि ही लगेगी।

 2019 के चुनाव पर नजर
केंद्र सरकार की अब सीधे नजर मई 2019 में होने वाले आम चुनावों पर है। इसलिए वो बजट में इस योजना की घोषणा करना चाहती है, ताकि एनडीए एक बार फिर से भारी बहुमत से जीत सकें। मोदी सरकार इस स्कीम पर दो साल से काम कर रही है।

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यन ने 29 जनवरी 2018 को कहा था कि अगले सालों में 1 और 2 राज्यों में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की शुरुआत हो सकती है। सुब्रमण्यन ने 2016-17 के आर्थिक सर्वे में यह सिफारिश की थी। 

यहां पर हो चुका है पायलट प्रोजेक्ट
मध्य प्रदेश में साल 2010 से 2016 तक चले पायलट प्रॉजेक्ट में काफी सकारात्मक नतीजे आए थे। इंदौर के 8 गांवों की 6,000 की आबादी के बीच पुरुषों और महिलाओं को 500 और बच्चों को हर महीने 150 रुपये दिए गए। इसी तरह तेलंगाना और झारखंड जैसे छोटे राज्यों में भी इस तरह की स्कीम चल रही है। तेलंगाना में सरकार किसानों को फसल बोने से पहले और बाद में 4-4 हजार रुपये की मदद देती है। 

इन देशों में लागू है यूबीआई
साइप्रस, फ्रांस, अमेरिका के कई राज्य, ब्राजील, कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, आयरलैंड, लग्जमबर्ग जैस देशों में इस तरह की व्यवस्था पहले से लागू है। 

Friday, December 21, 2018

न्यूज़ पेपर पर इसलिए बनी होती हैं ये 4 रंगीन बिंदियाँ, क्या आपको पता था?



हमारे ज़िंदगी में ऐसी कई छोटी-बड़ी बातें होती हैं जिनको हम प्रतिदिन सुनते अथवा देखते हैं, किन्तु उनके संबंध में कभी बात नहीं करते और न ही उन पर ध्यान ही देते हैं. यदि ध्यान देते भी हैं तो उसको अनदेखा कर देते हैं. ठीक इन्ही चीजों में से एक है अखबार में प्रिंट होने वाली 3 डॉट्स.

प्रत्येक न्यूज़ पेपर में पेज के नीचे 4 डॉट्स बने होते हैं, तो आज हम आपको इन्हीं डॉट्स का अर्थ बताएंगे जो आपने भी कभी न कभी या रोजाना देखते ही होंगे.


दरअसल इन 4 डॉट्स के द्वारा न्यूज़ पेपर वाले आपको बताना चाहते हैं जिस तरह कलर टीवी की जमाना आया है ठीक उसी तरह से अब रंगीन अखबार का भी समय आ चुका है. अमूमन पहले के वक़्त में अखबार मात्र काले तथा सफेद रंग के ही हुआ करते थे. किन्तु बदलते वक़्त में इनको और भी आकर्षक बनाने हेतु रंगीन फोटों दिखाने में इन 4 डॉट्स का एक ख़ास महत्व होता है.


हम बचपन से ही पढ़ते आए है की रंगों में 3 रंग सबसे प्रमुख होते हैं लाल, हरा व नीला, इन रंगों की मदद से तथा इनको आपस में मिलाकर हर प्रकार के रंग बनाए जा सकते हैं. किन्तु एक और रंग समूह होता हैं जिसके द्वारा दुनिया भर के समस्त रंग बनाये जा सकते हैं और वो है CMYK.

C - Cyan (प्रिंटिंग में इसका मतलब है नीला)
M - Magenta (गुलाबी)
Y - Yellow (पीला)
K - Black (काला)

RGB (रेड, ग्रीन और ब्लू) के अलावा इन 4 रंगों को भी एक सही अनुपात में मिलाकर अन्य कोई रंग प्राप्त किया जा सकता है.

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आखिर काले रंग के ही क्यों होते हैं गाड़ियों के टायर, जबकि छोटे बच्चों की साइकिल के होते हैं रंगीन

 

दोस्तों क्या आप जानते हैं हर गाड़ी के टायर काले रंग के क्यों होते हैं जबकि छोटे बच्चों की साइकिलों के टायर तो सफेद, लाल, पीले या दूसरे रंगों के भी होते हैं। आखिर टायर बनाने वाली कंपनी सफेद, पीला, नीला, हरा, गुलाबी या किसी और कलर का टायर क्यों नहीं बनाती है। शायद आपके मन में भी यह सवाल कभी ना कभी आया होगा।
भारत ही नहीं विदेशों में भी गाड़ियों के टायर काले रंग के ही होते हैं। इसके पीछे एक बहुत गहरा राज छिपा हुआ है। टायर बनाने वाली सभी कंपनियां टायर का रंग काला ही रखना पसंद करती हैं। तो चलिए हम बताते हैं कि टायर का रंग काला क्यों होता है।


ये तो आप जानते ही हैं कि टायर रबड़ से बनता है लेकिन प्राकृतिक रबड़ का रंग तो स्लेटी होता है तो फिर टायर काला कैसे? दरअसल, टायर बनाते समय रबड़ का रंग बदला जाता है और ये स्लेटी से काला हो जाता है टायर बनाने की प्रक्रिया को वल्कनाइजेशन कहते हैं।


टायर बनाने के लिए रबड़ में काला कार्बन भी मिलाया जाता है, जिससे रबर जल्दी नहीं घिसे। अगर सादा रबर का टायर 10 हजार किलोमीटर चल सकता है तो कार्बन युक्त टायर एक लाख किलोमीटर या उससे अधिक चल सकता है। अगर टायर में साधारण रबर लगा दिया जाए तो यह जल्दी ही घिस जाएगा और ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा, इसलिए इसमें काला कार्बन और सल्फर मिलाया जाता है। जिससे टायर काफी दिनों तक चलता है।


आपको बता दें कि काले कार्बन की भी कई श्रेणियां होती हैं। रबर मुलायम होगी या सख्त यह इस पर निर्भर करेगा कि कौन सी श्रेणी का कार्बन उसमें मिलाया गया है। मुलायम रबर के टायरों की पकड़ मजबूत होती है लेकिन वो जल्दी घिस जाते हैं, जबकि सख्त टायर आसानी से नहीं घिसते और ज्यादा दिन तक चलते हैं।


टायर बनाते वक्त इसमें सल्फर भी मिलाया जाता है और कार्बन काला होने के कारण यह अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से भी बच जाता है। आपने किसी टायर को जलते हुए देखा हो तो शायद गौर किया हो कि उससे धुआं बहुत ही काला निकलता है। उसका कारण भी यही ब्लैक कार्बन और सल्फर होता है।


वैसे आप देखते होंगे कि बच्चों की साइकिलों में सफेद, पीले और दूसरे रंगों के टायर लगे होते हैं। इसका कारण है कि बच्चों की साइकिल रोड पे ज्यादा नहीं चलती है और बच्चों के साइकिल में काला कार्बन नहीं मिलाया जाता है, इसलिए ये टायर ज्यादा दिन तक नहीं चलते हैं और जल्दी घिस जाते हैं। इस तरह के टायर को निम्न कोटि का टायर भी कहते हैं।


वैज्ञानिकों ने खोजा ऐसा कागज जिस पर लिखा जा सकेगा कई बार, फिर मिट जाएगी स्याही


वैज्ञानिकों ने आसानी से बनाये जाने वाले एक ऐसे कागज को विकसित किया है जिसपर बार-बार लिखा या मुद्रित किया जा सकता है.

बीजिंग: वैज्ञानिकों ने आसानी से बनाये जाने वाले एक ऐसे कागज को विकसित किया है जिसपर बार-बार लिखा या मुद्रित किया जा सकता है. मुद्रित सामग्रियों का अक्सर एक बार ही उपयोग किया जाता है और फिर उन्हें फेंक दिया जाता है, जिससे कचरा पैदा होता है और प्रदूषण फैलता है. चीन में फुजियान नॉर्मल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता लंबे समय तक चलने वाले और पुनः लिखने योग्य कागज बनाने की एक ऐसी सरल विधि विकसित करना चाहते थे जिसे तापमान में परिवर्तन कर आसानी से साफ किया जा सके.

‘एसीएस अप्लायड मैटेरियल्स एंड इंटरफेसेज’ नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, इस कागज पर लिखा संदेश छह माह से भी अधिक समय तक दिख सकता है, जबकि फिर से लिखने योग्य अन्य तरह के कागजों पर लिखी बात कुछ दिनों या कुछ महीनों के बाद ही मिटने लगती हैं. फिर से लिखने योग्य कागज का विचार नया नहीं है. पिछले कुछ दशकों से शोधकर्ताओं के कई समूह विभिन्न शोध रणनीतियों के साथ इस काम में लगे हुए हैं. 

Thursday, December 20, 2018

आपको पता है धरती के 3000 फुट नीचे है एक गांव!

क्या आप जानते हैं अमेरिका के उस गांव के बारे में जो जमीन के 3000 फुट नीचे छुपा हुआ हुआ है। ये कोर्इ एतिहासिक घटना नहीं बल्कि वर्तमान दौर की बात है। ...


धरती के नीचे गांव

आज जब चंद गिने चुने अंडरग्राउंड होटलों आैर रिजाॅर्टस में लोग एक दिन रहने के हजारों लाखों खर्च करने को तैयार हो जाते हैं, एेसे में एक पूरा गांव है जो बसा ही धरती के नीचे हैं। हालाकि इस गांव की आबादी काफी कम है पर दुनिया भर की पर्यटन की जानकारी देने वाली साइट़स आैर संस्थाआें के बीच ये काफी मशहूर है। एडवेंचर प्रेमी सैलानी हजारों की तादात में यहां आने के लिए उत्सुक रहते हैं। 

कहां है ये गांव 

ये गांव अमरीका के प्रसिद्ध ग्रैंड कैनियन के पास हवासू कैनियन में सुपाई नाम से जाना जाता है। एक ऐसा गांव, जो ज़मीन की सतह से तीन हज़ार फ़ुट नीचे बसा हुआ है। इसे देखने के लिए हर साल दुनिया भर से क़रीब 55 लाख लोग एरिज़ोना आते हैं। हवासू कैनियन के पास एक गहरी खाई है जहां ये प्राचीन गांव बसा हुआ है। इस गांव की कुल आबादी 208 बताई जाती है। जमीन की सतह से करीब 3000 फुट नीचे बसे इस गांव के रहने वाले अमरीका के मूल निवासी रेड इंडियन हैं।

हवा में उड़ कर आयें या पांव पांव


आप को शायद हमारी बात अजीब लग रही पर यह वास्तविकता है। आज भी ये स्थान बाहरी आधुनिक दुनिया से काफी कटा हुआ है क्‍योंकि यहां आवागमन के साधन काफी सीमित हैं। यहां या तो कठिन सफर करके पैदल जाया जा सकता है या खच्‍चर पर बैठ कर। एक और जरिया है यहां आने वाले इक्‍का दुक्‍का हवाई जहाज, जो गांव को नजदीकी हाइवे से जोड़ते हैं। यहां तक गांव में आज भी चिट्ठियां ले जाने का काम खच्‍चरों पर ही किया जाता है।  

मिलिए पहले पूरी तरह स्वचालित बर्गर बनाने वाले रोबोट से, नाम है क्रिएटर


कल्पना कीजिए एक एेसे किचन की जहां तेजी से एक बार में सैंकड़ो बर्गर बनाने का काम चल रहा है, पर यहां इंसान नहीं एक रोबोट काम में लगा है।...

पहला पूर्णत स्वचालित बर्गर रोबोट

वैसे आज ये बाद कोर्इ कल्पना नहीं रह गर्इ है कि आपको किचन में एक रोबोट काम करता नजर आये। फिल्हाल हम जिस रोबोट की बात कर रहे हैं वो एक बर्गर रेस्टोरेंट में शेफ है। डेलीमेल आैर फोर्ब्स की खबरों के अनुसार इस रोबोट का क्रिएटर है आैर ये अमेरिका में सैन फ्रांसिसको के एक इलाके में बने रेस्टोरेंट में काम कर रहा है। फोर्ब्स का कहना है क्रिएटर अपने किस्म का विश्व का पहला पूर्णत स्वचालित बर्गर रोबोट है। क्रिएटर का बनाया बर्गर एकदम ताज़ा, स्वादिष्ट और सही पका हुआ रहता है। साथ ही इससे बर्गर बनवाने का सबसे बड़ा फायदा है कि ये तेज़ी से ढेर सारे बर्गर एक साथ तैयार कर देता है।

सारा डाटा है फीड

क्रिएटर एक बराबर स्लाइस में टमाटर, पनीर, चिकन और प्याज़ काट सकता है, कटे हुए मांस की टिक्कियों को भून सकता है और बर्गर के लिए ब्रेड को गोलाकार काट कर इन सभी सामानों को सलीक़े से एक के ऊपर एक परत जमाकर रख सकता है। खास बात है कि ये सारा काम वो बिना किसी गलती आैर हड़बड़ी के वो एक साथ निश्चित क्रम में कर सकता है। क्योंकि इसके लिए उसकी पूरी प्रोग्रामिंग की गर्इ है। इतना ही नहीं इसमें ये भी जानकारी फीड की गर्इ है कि वो ग्राहक की मांग के हिसाब से बर्गर पर मसाले छिड़कर कर इसे कड़क या हल्का सेंक सकता है। फिल्हाल क्रिएटर सोशल मीडिया पर जम कर वायरल हो रहा है आैर उससे जुड़ी खबरें खूब ट्वीट हो रही हैं।

एेसे करता है काम


क्रिएटर रोबोट एक घंटे में 120 बर्गर बनाता है। ये ख़ुद थर्मल सेंसर से चलने वाली मशीन से नियंत्रित होता है. ताकि, मांस या दूसरी टिकियां बिल्कुल सही तरीक़े से पकें यानि न जले, न कच्ची रह जा। इसमें 350 सेंसर लगे हैं और ये 20 कंप्यूटरों की मदद से चलता है। इस आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मशीन में भरा डेटा एेसा कि ये बर्गर को हर ग्राहक की पसंद के हिसाब से तैयार कर सकता। क्रिएटर के बनाये बर्गर में कभी भी न चीज़ ज़्यादा होता है, न प्याज़ जलता है ना ही सॉस और जैम का अनुपात बिगड़ता है। इसकी मैमोरी में फीड जानकारी ये भी जानती है कि कैसे मेक्सिकन बर्गर या वड़ा पाव बनेगा। क्रिएटर के बनाये बर्गर 6 डॉलर में एक के हिसाब से बिक रहे हैं। ये पांच मिनट में एक बर्गर तैयार करता है और एक साथ कई बर्गर बनते हैं। उस हिसाब से प्रति तीस सेकेंड में एक बर्गर बन जाता है।